कोरबा निगम में प्रोटोकॉल की धज्जियां: महापौर-सभापति को नहीं मिला आमंत्रण, गुस्से में जमीन पर बैठे सभापति, प्रभारी सचिव को नोटिस जारी

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में जनप्रतिनिधियों के सम्मान और शासकीय प्रोटोकॉल को लेकर घमासान मच गया है। निगम द्वारा आयोजित करोड़ों के विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम में महापौर और सभापति को ही आमंत्रित न किए जाने से उपजा विवाद अब प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप का कारण बन चुका है। अपनी उपेक्षा और अपमान से नाराज नगर निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने विरोध का अनोखा रास्ता अपनाते हुए अपनी सरकारी कुर्सी छोड़ दी और जमीन पर बैठकर कामकाज करना शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 6 जून को कोरबा नगर निगम के अंतर्गत विभिन्न चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग सेंटर का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन शामिल हुए थे।

लेकिन, नगर निगम के इस महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रम में प्रथम नागरिक महापौर संजू देवी राजपूत और निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर को आमंत्रित तक नहीं किया गया। आमंत्रण पत्र (Invention Card) और मंच से गायब नाम को लेकर जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश फैल गया।

चेतावनी के बाद जमीन पर बैठे सभापति, निगम में मचा हड़कंप

इस घोर उपेक्षा को लेकर सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने 7 जून को ही अपनी तीखी नाराजगी जाहिर कर दी थी। शनिवार और रविवार को शासकीय अवकाश होने के कारण सोमवार, 8 जून को उन्होंने अपनी चेतावनी को अमलीजामा पहनाया। वे निगम कार्यालय पहुंचे, लेकिन अपनी वीआईपी कुर्सी पर बैठने के बजाय नीचे जमीन पर ही दरी बिछाकर बैठ गए और वहीं से फाइलों का निपटारा किया।

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सभापति के इस तरह जमीन पर बैठते ही निगम के प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। निगम मुख्यालय में हड़कंप मच गया और अधिकारी मान-मनौव्वल में जुट गए।

कमिश्नर का कड़ा एक्शन: प्रभारी सचिव को 3 दिन का अल्टीमेटम

मामले की गंभीरता और बढ़ते विवाद को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर (आयुक्त) ने तत्काल एक्शन लिया। आनन-फानन में निगम के प्रभारी सचिव रामेश्वर कंवर को कारण बताओ (स्पष्टीकरण) नोटिस जारी कर दिया गया है।

नोटिस में कड़े तेवर: कमिश्नर ने 8 जून को जारी नोटिस में प्रभारी सचिव से सीधे तौर पर पूछा है कि— ‘आखिरकार इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रम में महापौर और सभापति को आमंत्रण क्यों नहीं भेजा गया?’ कमिश्नर ने इस लापरवाही के लिए 3 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सुलगते सवाल: प्रशासनिक चूक या सोची-समझी राजनीतिक साजिश?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कोरबा की सियासत और प्रशासनिक हलकों में कई तरह के सवाल तैर रहे हैं:

क्या नगर निगम के इतने बड़े कार्यक्रम में महापौर और सभापति का नाम भूल जाना महज एक ‘प्रशासनिक चूक’ थी, या फिर यह किसी ‘राजनीतिक साजिश’ का हिस्सा था?

क्या कमिश्नर द्वारा प्रभारी सचिव को नोटिस जारी किए जाने के बाद सभापति का गुस्सा शांत होगा?

क्या स्पष्टीकरण का जवाब आने और अंतिम कार्रवाई होने तक सभापति इसी तरह जमीन पर बैठकर काम करेंगे?

फिलहाल, निगम कमिश्नर की इस त्वरित कार्रवाई के बाद अब सभी की निगाहें प्रभारी सचिव के जवाब और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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