
जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ का जलवा ! देश में नंबर-1, PM मोदी के सामने CM साय ने पेश किया राज्य का अनोखा मॉडल
रायपुर : पानी बचाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण (JSJB 3.0) में छत्तीसगढ़ को देश में पहला स्थान मिला है। राज्य के पांच जिलों ने भी टॉप-10 में जगह बनाकर इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय जल सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे कामों की जानकारी दी। सम्मेलन में खास तौर पर किसानों की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए जल संरक्षण मॉडल को सामने रखा गया।
पांच जिलों का भी शानदार प्रदर्शन
राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम शामिल हैं। इन जिलों ने देश के शीर्ष 10 जिलों में जगह बनाई है।
कोरिया मॉडल ने खींचा ध्यान
छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति में कोरिया जिले का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ खास आकर्षण रहा। इस पहल के तहत किसान अपनी जमीन का करीब पांच प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से बारिश का पानी रोकने और भूजल रिचार्ज के लिए उपलब्ध करा रहे हैं।
इसका उद्देश्य बारिश के पानी को बहने से रोककर उसे खेत में ही संरक्षित करना और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाना है। इस काम में किसान, पंचायत और स्थानीय समुदाय मिलकर भूमिका निभा रहे हैं।
तीन चरणों में कितना हुआ काम ?
- JSJB 1.0 : 4.05 लाख जल संरचनाएं तैयार की गईं।
- JSJB 2.0 : 24 लाख से अधिक संरचनाएं पंजीकृत हुईं और 23 लाख से ज्यादा पूरी की गईं।
- JSJB 3.0 : 79,775 संरचनाएं पंजीकृत हुईं, जिनमें 77,719 पूरी हो चुकी हैं।
26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक
जल संरक्षण के प्रयासों के बीच राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या में भी कमी आई है। ऐसे ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने की उम्मीद भी जताई गई है।
हर राज्य के लिए अलग ‘Catch the Rain Plan’
राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि देश के हर राज्य को अपनी जरूरत और परिस्थितियों के हिसाब से ‘Catch the Rain Plan’ तैयार करना चाहिए। इसके लिए स्थानीय बारिश, भौगोलिक स्थिति और भूजल स्तर को आधार बनाया जाए।

उन्होंने जल संरक्षण में बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए State Water Awards शुरू करने, BISAG-N के जरिए जल संरचनाओं की मैपिंग और हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया।
गांवों की भागीदारी बनी छत्तीसगढ़ की ताकत
छत्तीसगढ़ की उपलब्धि के पीछे सबसे अहम बात यह है कि जल संरक्षण को केवल सरकारी अभियान तक सीमित नहीं रखा गया। खेतों में पानी रोकने से लेकर जल संरचनाओं के निर्माण तक किसानों और स्थानीय समुदायों को जोड़ा गया है।

Leave a Reply