पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में थामा रैंप, कोसा सिल्क में दिखा आत्मविश्वास; बदली जिंदगी की दिखी नई तस्वीर, बस्तर के जंगलों में कभी हथियार उठाने वाली आत्मसमर्पित महिला नक्सलियां मुख्यधारा में लौटने के बाद राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मंच पर रैंप पर उतरीं, तालियों से गूंजा सभागार

रायपुर। बस्तर के जंगलों में कभी हथियार उठाने वाली और अब आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुकीं पूर्व महिला नक्सलियों की जिंदगी का एक अलग रंग राजधानी रायपुर में देखने को मिला। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में इन महिलाओं ने कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों में रैंप वॉक किया। रैंप पर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाती महिलाओं को देखकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

कभी नक्सल हिंसा और जंगलों की जिंदगी का हिस्सा रहीं इन महिलाओं ने बताया कि वे पहली बार रायपुर आई हैं और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने बड़े मंच पर आने का अवसर मिलेगा। रैंप पर चलने के अनुभव को उन्होंने खुशी और सम्मान से जोड़ा तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।

इस पूरे घटनाक्रम ने बस्तर में नक्सलवाद से मुख्यधारा की ओर लौट रही जिंदगी की एक अलग तस्वीर सामने रखी है। हथियार छोड़ चुकीं इन महिलाओं के हाथों में अब हुनर और आत्मनिर्भरता की राह है, जबकि रैंप पर उनका आत्मविश्वास उनके बदले हुए जीवन की झलक देता नजर आया।

महिलाओं के अपने बयान से सामने आया अलग पक्ष

कार्यक्रम को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों को सिलाई प्रशिक्षण के लिए रायपुर बुलाया गया था और कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना उन्हें फैशन शो में रैंप पर उतार दिया गया।

हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने अपने अनुभव में अलग बात कही। उन्होंने बड़े मंच पर पहुंचने और रैंप पर चलने के अवसर को लेकर खुशी जाहिर की। महिलाओं के मुताबिक यह उनके लिए पहली बार था और उन्होंने इस अनुभव को यादगार बताया।

ऐसे में कार्यक्रम को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के बीच स्वयं महिलाओं की बात भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मंच पर उनकी सक्रिय भागीदारी और रैंप वॉक के दौरान नजर आया उत्साह पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष सामने रखता है।

ANI ने भी इस घटनाक्रम का वीडियो साझा किया है। वीडियो में बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के बाद रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में रैंप पर चलते हुए देखा जा सकता है। रैंप पर महिलाओं की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की ओर से जोरदार तालियां बजती दिखाई दे रही हैं।

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कोसा सिल्क के परिधानों में दिखा नया आत्मविश्वास

प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में आत्मसमर्पित महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों को पहनकर रैंप वॉक किया। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

यह प्रस्तुति सिर्फ रैंप वॉक तक सीमित नहीं रही। आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं के लिए यह सार्वजनिक मंच पर अपनी पहचान और आत्मविश्वास दिखाने का अवसर भी बना। नक्सल हिंसा के रास्ते से बाहर निकलकर अब ये महिलाएं हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं।

‘विष्णु भैया’ ने बढ़ाया महिलाओं का हौसला

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनका उत्साह बढ़ाया। महिलाओं ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मान, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में महिलाओं की भागीदारी उन्हें समाज के सामने अपनी प्रतिभा और नए आत्मविश्वास को दिखाने का अवसर देती है।

कोसा को ‘लोकल टू ग्लोबल’ बनाने की तैयारी

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया।

कोसा और पारंपरिक हथकरघा को व्यापक बाजार से जोड़ने की पहल के बीच आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों की रैंप वॉक ने आयोजन को एक अलग पहचान दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, बुनकरों का हुनर और नक्सल हिंसा से मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं की नई जिंदगी की तस्वीर दिखाई दी।

बंदूक से रैंप तक का सफर

बस्तर की इन महिलाओं का सफर एक बड़े बदलाव की कहानी भी बताता है। कभी जंगलों में हथियार उठाने वाली महिलाएं अब सामान्य जीवन की ओर लौटकर अपने हुनर और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। रायपुर के मंच पर उनका रैंप वॉक इसी बदलाव की एक प्रतीकात्मक तस्वीर बनकर सामने आया।

कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन मंच पर मौजूद महिलाओं की अपनी बात, उनकी सक्रिय भागीदारी और रैंप पर दिखाई दिया आत्मविश्वास पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने रखते हैं।

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