109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर, यूनिवर्सिटी की क्युरेटिव पिटीशन खारिज

Bilaspur Highcourt News:– 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में सेंट्रल यूनिवर्सिटी को झटका, सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पिटीशन सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

Bilaspur Highcourt News:– 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन लगाई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया है।

Bilaspur बिलासपुर। 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने एसएलपी के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू फाइल किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने रिव्यू के आदेश को चुनौती देते हुए क्युरटिव पिटीशन फाइल किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कार्यरत 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 5 मार्च 2008 के छग शासन के नियमितीकरण आदेश के आधार पर 26 अगस्त 2008 को नियमित किया गया था। 15 जनवरी 2009 को गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी बन गई और सभी 109 कर्मचारी नियमित कर्मचारी के रूप में सेंट्रल यूनिवर्सिटी का हिस्सा बने। सबने उपरोक्त आदेश के अनुशरण में यूनिवर्सिटी में काम करना शुरू कर दिया और 31 मार्च 2009 तक 8,209 रुपए वेतन प्राप्त किया। अचानक बिना किसी नोटिस के उनका वेतन वापस ले लिया गया और अप्रैल 2009 से कलेक्टर दर पर भुगतान किया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत कर चुनौती दी। उक्त रिट

याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण आदेश 19 फरवरी 2010 के आदेश रद्द कर दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने रिट याचिका के माध्यम से न्यायालय समक्ष 19 फरवरी 2010 के आदेश को चुनौती दी गई, जिसके द्वारा 26 अगस्त 2008 को जारी नियमितीकरण आदेश को 22 सितंबर 2008 से रद्द कर दिया गया था। छग उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने 6 मार्च 2023 को आदेश पारित करते हुए कहा कि ऊपर बताई गई चर्चा के आधार पर 19 फरवरी 2010 का विवादित आदेश टिकने लायक नहीं है और इसलिए इसे रद्द किया जाता है। इसके नतीजे में याचिकाकर्ता यूनिवर्सिटी के रेगुलर कर्मचारी माने जाएंगे और उनका रेगुलराइजेशन एक्ट 2009 के सेक्शन 4 डी के तहत सुरक्षित रहेगा। याचिकाकर्ता 26 जून 2008 के आदेश मुताबिक अपनी सेवाओं के रेगुलराइजेशन की तारीख से रेगुलर कर्मचारी के तौर पर सभी फायदे पाने के हकदार होंगे। नतीजतन ऊपर बताई गई याचिका मंजूर की जाती है।

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सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए सीयू ने रिट अपील फाइल की थी, डिवीजन बेंच ने सभी रिट अपील याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सीयू ने सभी आदेश को चुनौती देते हुए सु हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसएलपी फाइल की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2024 को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने छग उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के पास किए गए आदेश के पालन के लिए रेस्पोंडेंट अथारिटीज के सामने एप्लीकेशन दिया था। लेकिन यूनिवर्सिटी के कुलपति और रजिस्ट्रार एवं एमएचआरडी के सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया गया। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी ने एसएलपी के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के सामने रिव्यू फाइल किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी ने रिव्यू के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के सामने क्युरटिव पिटीशन फाइल की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने आदेश 2 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता दीपाली पांडे ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।

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