सुप्रीम कोर्ट का आदेश: नक्सल नेता का शव संरक्षित रखा जाए

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: नक्सल नेता का शव संरक्षित रखा जाए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ पुलिस को निर्देश दिया कि कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता कट्टा रामचंद्र रेड्डी के शव को फिलहाल न दफनाया जाए और न ही जलाया जाए। अदालत ने कहा कि जब तक इस मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट अपना फैसला नहीं सुनाता, शव को सरकारी शवगृह में सुरक्षित रखा जाए।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने यह आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट इस चरण पर किसी भी आरोप के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं कर रहा और सभी दावे खुले रहेंगे। पीठ ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट दुर्गा पूजा अवकाश के बाद इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करे।

बेटे ने लगाई गुहार
यह याचिका रेड्डी के बेटे राजा चंद्रा ने दायर की थी, जो हैदराबाद स्थित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में शोधकर्ता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को यातना देकर फर्जी मुठभेड़ में मारा गया और अब पुलिस शव को जल्दबाजी में ठिकाने लगाने की कोशिश कर रही है।

याचिका में मांग की गई है कि
1) मामले की जांच स्वतंत्र रूप से सीबीआई को सौंपी जाए,
2) छत्तीसगढ़ पुलिस व स्थानीय अधिकारियों को जांच से बाहर रखा जाए,
3) और शव का नया पोस्टमॉर्टम कराया जाए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक शव को सरकारी शवगृह में संरक्षित रखा जाए।

पुलिस का पक्ष

छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नारायणपुर जिले में 22 सितंबर को हुई मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए थे—कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यनारायण रेड्डी। उन्होंने कहा कि कट्टा रामचंद्र रेड्डी पर सात राज्यों ने कुल 7 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

मेहता ने बताया कि सत्यनारायण रेड्डी का शव उनके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया, जबकि रामचंद्र रेड्डी का शव अब भी अस्पताल में है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे पोस्टमॉर्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है ताकि पुलिस पर दुर्भावना का कोई आरोप न लगे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पीठ ने नोट किया कि याचिकाकर्ता ने पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अवकाश होने के कारण तत्काल सुनवाई संभव नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने अंतरिम राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के निर्णय तक शव को संरक्षित रखा जाए।

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