कोरबा में मज़दूर महासभा का शंखनाद: SECL में ठेका श्रमिकों के शोषण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, नए श्रम कानूनों के तहत नियमितीकरण की मांग

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में कार्यरत हजारों ठेका श्रमिकों के आर्थिक उत्पीड़न, शोषण और कानूनी अधिकारों के हनन के खिलाफ राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। फेडरेशन के महामंत्री भागवत प्रसाद दुबे ने एक विशेष वक्तव्य जारी करते हुए प्रबंधन पर श्रमिकों को मनोवैज्ञानिक और आर्थिक रूप से कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है।

महामंत्री दुबे ने कहा, “जो मज़दूर अपनी जान जोखिम में डालकर मुख्य कोयला खदानों में नियमित कर्मचारियों की तरह दिन-रात काम कर रहे हैं, उन्हें केवल ‘ठेका श्रमिक’ बताकर प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि उन्हें जब चाहे काम से निकाला जा सके।”

शोषण के प्रमुख बिंदु और नए श्रम कानूनों (OSHW Code) का उल्लंघन

फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि देश में कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के नियमों का कभी पालन नहीं हुआ। नियमतः 3 दिनों के भीतर एम्प्लॉयमेंट कार्ड मिलना चाहिए, जो किसी को नहीं मिला। हर एरिया और कोलरी में मज़दूरों का वेतन अलग-अलग है। इसके अलावा 5 प्रमुख विसंगतियां सामने रखी गई हैं:

1. अमानवीय कार्य परिस्थितियां

खदानों में श्रमिकों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) के और बिना किसी ओवर-टाइम (OT) भुगतान के, रोजाना 12-12 घंटे जबरन काम कराया जा रहा है।

2. HPC वेतन योजना एक छलावा

पूर्व में बनी HPC वेतन योजना में उच्च कुशल (Highly Skilled) ठेका मज़दूरों का वेतन भी SECL के कैटेगरी-1 के सबसे सामान्य रेगुलर मज़दूर से कम रखा गया। जे.बी.सी.सी.आई. (JBCCI) के सदस्य यूनियनों ने भी इस विसंगतिपूर्ण योजना पर हस्ताक्षर कर ठेका मज़दूरों को असहाय छोड़ दिया।

3. नियुक्ति पत्र की अनिवार्यता का उल्लंघन (धारा 6)

21 नवंबर 2025 से देश में लागू हुए नए श्रम कानूनों के अंतर्गत OSHW Code 2020 की धारा 6 के तहत प्रत्येक श्रमिक को लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य है, जिससे प्रबंधन लगातार बच रहा है।

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4. समान कार्य – समान वेतन का अधिकार (धारा 8)

नए कानून की धारा 8 स्पष्ट करती है कि समान कार्य के लिए ठेका श्रमिकों को भी नियमित श्रमिकों के समान ही वेतन और सेवाशर्तें पाने का पूरा कानूनी अधिकार है।

5. कोर एक्टिविटी में ठेका प्रथा पर रोक (धारा 57)

OSHW Code की धारा 57 के अनुसार किसी भी संस्थान के मुख्य कार्यों (Core Activities) में ठेका श्रमिक नहीं लगाए जा सकते। इसके बावजूद SECL अपने सभी मुख्य कार्यों में ठेका मज़दूरों से काम ले रहा है, जैसे:

कोयला निकालना और परिवहन

सपोर्ट रूफ बोल्टिंग और लाइन बिछाना

ट्रामर, ड्रिलिंग, डोजर, ग्रेडर और पी.सी. ऑपरेटर समेत भारी मशीनों का संचालन।

फेडरेशन की मुख्य मांग: “अब अंतरिम राहत नहीं, सीधा नियमितीकरण चाहिए”

राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि अब ठेका श्रमिकों को कोई लॉलीपॉप या अंतरिम HPC वेतन नहीं चाहिए।

मुख्य मांग: चूंकि SECL का पूरा अस्तित्व कोयला उत्खनन (Core Activity) पर टिका है और ठेका श्रमिक यही मुख्य कार्य कर रहे हैं, इसलिए OSHW Code 2020 की धारा 57 के तहत इन सभी श्रमिकों को तत्काल प्रभाव से SECL के नियमित (रेगुलर) कर्मचारी के रूप में समायोजित किया जाए।

कोरबा में जुटेगी महापंचायत, मज़दूरों से एकजुट होने की अपील

इस ऐतिहासिक लड़ाई की पहली कड़ी के रूप में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक विशाल मज़दूर महासभा का आयोजन किया जा रहा है। फेडरेशन के महामंत्री भागवत प्रसाद दुबे ने देश और प्रदेश के सभी ठेका मज़दूरों को अपने हक की आवाज़ बुलंद करने के लिए भारी से भारी संख्या में कोरबा पहुंचने का आह्वान किया है।

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