कोरबा: घूसखोर बाबू प्रदीप मिश्रा सस्पेंड; आदत से लाचार, इसी महीने मिली थी एक और सज़ा

कोरबा। छत्तीसगढ़ की साय सरकार के ‘सुशासन’ अभियान को ठेंगा दिखाते हुए सुशासन तिहार शिविर में ही रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-2 प्रदीप मिश्रा को शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। भ्रष्टाचार के आदी हो चुके इस बाबू के खिलाफ यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है; इसी महीने की 11 तारीख को एक अन्य मामले में उसकी एक वेतन वृद्धि (Salary Increment) रोकने का दण्ड भी दिया जा चुका है।

???? सुशासन शिविर में ही ले रहा था ₹40,000 की रिश्वत

एसीबी (ACB) की कार्रवाई: 29 मई 2026 को बिलासपुर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) की टीम ने तुमान कैम्प में बड़ी कार्रवाई की।

रंगे हाथ गिरफ्तार: विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की घूस लेते रंगे हाथ दबोचा गया।

भेजा गया जेल: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी बाबू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

कटघोरा अटैच: जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि में प्रदीप मिश्रा का मुख्यालय बीईओ कार्यालय कटघोरा तय किया गया है।

???? सेवा पुस्तिका (Service Book) गायब करने पर भी मिल चुका है दण्ड

प्रदीप मिश्रा की स्वेच्छाचारिता का आलम यह है कि इसी महीने 11 मई 2026 को भी उसे एक विभागीय सज़ा मिल चुकी है।

  563.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज

मामला: शासकीय शाला चंदरौटी में पदस्थ शिक्षक (एल.बी.) शेख कसीम मोहम्मद की मूल सेवा पुस्तिका गुम हो गई थी। इस लापरवाही के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए प्रभारी लिपिक अभिषेक आहेर और प्रदीप मिश्रा दोनों की आगामी एक-एक वेतनवृद्धि (असंचयी प्रभाव से) रोकने का दण्ड दिया गया था।

???? कदाचरण का पुराना इतिहास: अधिकारियों के नाम पर लेता था घूस

बीईओ कार्यालय पोड़ी उपरोड़ा में लंबे समय से जमे प्रदीप मिश्रा का विवादों और कदाचरण से पुराना नाता रहा है:

अधिकारियों पर मढ़ने की कोशिश: ₹40,000 की रिश्वत मामले में जब एसीबी ने पूछताछ की, तो शातिर बाबू ने अपने बीईओ और जिला ट्रेजरी कार्यालय के अधिकारियों का नाम लेते हुए कहा कि वह उनके कहने पर हिस्सा कलेक्ट कर रहा था। हालांकि, एसीबी की जांच में यह दावा पूरी तरह निराधार साबित हुआ।

पहले भी हो चुका है सस्पेंड: इससे पहले पूर्व बीईओ जोगी के कार्यकाल के दौरान भी वित्तीय अनियमितताओं और गंभीर लापरवाही के चलते मिश्रा पर निलंबन की गाज गिर चुकी है।

बड़ा सवाल: बार-बार की कार्रवाई के बाद भी इस शासकीय सेवक की आदतों में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे गंभीर मामलों में कड़े कदम न उठाए जाने के कारण भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें केवल निलंबन जैसी कार्रवाइयों का कोई डर नहीं रह गया है।

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