गांव में 60 से ज्यादा बच्चे, बांस-बल्ली से स्कूल तो बनाया लेकिन पढ़ाने


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शिक्षक भी नहीं आते, कई गंभीर रूप से कुपोषित भी शिक्षा सत्र समाप्ति पर, लेकिन बिना गुंडा में पढ़ाई शुरू ही नहीं, स्कूल भी बंद

 

कांकेर जिले के सरहद से लगा बिना गुंडा गांव नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के कोंगे पंचायत का आश्रित गांव है। यहां 27 परिवार के 200 की आबादी निवासरत है। यहां बांस-बल्ली से स्कूल तो बनाया गया है, लेकिन स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं पहुंच रहे हैं। इसके चलते इस शिक्षा सत्र में अब तक पढ़ाई ही शुरू नहीं हो पाई है। गांव में 60 से अधिक बच्चे हैं।

 

 

कांकेर जिला के प्राथमिक शाला कंदाड़ी में कराया था। लेकिन अक्टूबर में बच्चों को दूसरे जिले का बताते हुए निकाल दिया गया है। ग्रामीण सुक्कू, पंडरु, मनकू पद्दा ने कहा कि पहले स्कूल में दो-तीन महीने में एक बार शिक्षक स्कूल आते थे, लेकिन अब तो सत्र ही समाप्त होने वाली है अब तक स्कूल में शिक्षक नहीं पहुंचे हैं। इसके चलते अब तक पढ़ाई ही नहीं शुरू हो पाई है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए जुलाई महीने में कंदाड़ी प्राथमिक स्कूल में प्रवेश के लिए गए। कंदाड़ी के हेडमास्टर ने दूसरे जिले के बच्चे कहकर नारायणपुर बीईओ से आदेश मंगवाया। दूसरे जिले के बच्चे कहकर अक्टूबर में बिना कोई सूचना दिए बच्चों को स्कूल से निकाल दिया।

 

 

यहां के 38 बच्चे दूर-दूर के आश्रमों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन गांव में रहने वाले बच्चे पढ़ाई से पूरी तरह से वंचित हैं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पालकों ने अपने बच्चों का प्रवेश

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5 साल में सिर्फ एक दिन गर्म भोजन व रेडी-टू-ईट मिला

 

सरकार भले ही कुपोषण की मुक्ति के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ बिना गुंडा के बच्चों को नही मिल रहा है। अति कुपोषित बच्चे गांव में होने के बावजूद भी महिला बाल विकास विभाग घ्यान नहीं दे रहे हैं। गांव में 5 साल से आंगनबाड़ी संचालित है, लेकिन 5 साल में

 

 

केवल एक दिन गर्म भोजन और एक बार रेडी-टू-ईट आहार मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित है, लेकिन यहां इलाज की कोई सुविधा नहीं है। यहां से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर छोटे बेठिया में इलाज के लिए जाते हैं, लेकिन वहां भी कोई सरकारी सुविधा नहीं है।

 

ग्रामीणों के भी हस्ताक्षर

जांच कराता हूं: बीईओ

ओरछा के बीईओ डीबी रावटे ने कहा कि वहां के पदस्थ शिक्षक द्वारा जीरो दर्ज संख्या का प्रतिवेदन कार्यालय में जमा किया है। इसमें ग्रामीणों का भी हस्ताक्षर है।

बीईओ कोयलीबेड़ा देव कुमार शील ने कहा कि किस कारण से प्रवेश नहीं दिया गया है। मैं जांच कराता हूं। बच्चों को स्कूल से अब निकलना गलत है।

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