कोरबा: ब्राह्मण पारा में मौत को दावत देते झूलते बिजली के तार, ‘हादसे के इंतजार’ में विद्युत विभाग; कलेक्टर तक पहुंची बात

कोरबा:

नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक 6 (ब्राह्मण पारा, मस्जिद के पीछे, पुरानी बस्ती) में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ पिछले एक साल से झूलते और बार-बार टूटकर गिरने वाले बिजली के तार स्थानीय लोगों के लिए काल बने हुए हैं। बार-बार की शिकायतों के बाद भी जब बिजली विभाग ने सिर्फ ‘अस्थायी पैचवर्क’ (तार जोड़कर) काम चलाया, तो परेशान होकर स्थानीय निवासी मिर्जा आसिफ बेग ने सीधे कलेक्टर जनदर्शन की चौखट खटखटाई है।

समस्या की जड़: 80 मीटर की दूरी पर पोल, हवा चलते ही टकराते हैं तार

कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में बताया गया है कि मोहल्ले से गुजरने वाली एल.टी. (LT) बिजली लाइन बुरी तरह झूल चुकी है।

दूरी का बड़ा फासला: दो पोल के बीच लगभग 75 से 80 मीटर की दूरी है, जो तकनीकी रूप से काफी ज्यादा है।

खतरे की आंधी: थोड़ी सी भी तेज हवा या आंधी चलने पर तार आपस में टकराते हैं और टूटकर नीचे गिर जाते हैं।

राहगीरों और बच्चों पर हर वक्त मंडरा रहा है मौत का साया

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि गली संकरी होने के कारण झूलते तारों से बचकर निकलना पड़ता है। सबसे ज्यादा खतरा ट्यूशन या स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग राहगीरों को है। किसी दिन कोई बड़ा तार किसी राहगीर पर गिर गया, तो अनहोनी तय है।

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“हादसे के बाद जागने से क्या फायदा?”

क्षेत्रवासियों का सीधा सवाल है कि क्या प्रशासन और विद्युत विभाग किसी की जान जाने के बाद ही कोई कड़ा कदम उठाएगा? अनहोनी से पहले खतरे को टालना जरूरी है।

एक साल पहले भी हुई थी शिकायत, विभाग ने की सिर्फ ‘खानापूर्ति’

यह कोई नई समस्या नहीं है। आवेदन के मुताबिक:

7 मई 2025 को भी छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) के नगर संभाग, तुलसी नगर जोन के सहायक अभियंता को लिखित शिकायत दी गई थी।

विभाग ने तब केवल टूटे तारों को आपस में जोड़कर (गांठ बांधकर) छोड़ दिया, जो कि एक साल बाद आज फिर जस की तस जानलेवा स्थिति में है।

कलेक्टर से गुहार: नया पोल लगाएं या लाइन दुरुस्त करें

शिकायतकर्ता आसिफ बेग और वार्ड वासियों ने कलेक्टर से मांग की है कि:

बिजली विभाग के अधिकारियों को तत्काल कड़े निर्देश जारी किए जाएं।

बीच की दूरी को कम करने के लिए नया बिजली पोल (खंभा) लगाया जाए।

तारों को कसकर सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित किया जाए ताकि भविष्य में कोई जनहानि न हो।

अब देखना होगा कि जनदर्शन में आए इस गंभीर मामले पर जिला प्रशासन कितनी मुस्तैदी से एक्शन लेता है।

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