हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने और बैंक में भूमि बंधक रहने के चलते प्रकरण किया खारिज, क्षुब्ध होकर तहसीलदार गरिमा को रिश्वत लेने के नाम से बदनाम कर रहा आवेदक

Bilaspur बिलासपुर। बिलासपुर तहसील में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला है। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के चलते खाता विभाजन का प्रकरण तहसीलदार गरिमा सिंह ठाकुर ने खारिज कर दिया। जिससे क्षुब्ध होकर आवेदक के द्वारा तहसीलदार गरिमा के विरुद्ध अनगर्ल शिकायतें कर उन पर दबाव बनाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। आवेदक के द्वारा कलेक्टर के पास झूठी शिकायत भी दर्ज कर वा दी गई हैं। वही दस्तावेजों का अवलोकन करें तो तहसीलदार पाक साफ नजर रही है।

पूरा प्रकरण ग्राम पंचायत कोरमी जिला बिलासपुर का है। इस ग्राम निवासी अनिल धुरी ने जिला कलेक्टर के समक्ष दिनांक 25 – 08 – 2025 को एक लिखित शिकायत पत्र दिया है जिसमें उल्लेख किया गया है कि मौजा कोरमी में स्थित भूमि खसरा नंबर 25/1, 25/3, 178/3, 476/2, 495/2, 547/6, 553/2, 589/1, 591/16, 662/2 का प्रकरण माननीय सिविल न्यायालय बिलासपुर में चला है। लगभग 11 वर्ष तक प्रकरण चलने के बाद खाता विभाजन हेतु आदेश पारित किया गया है। उक्त आदेश का परिपालन हेतु तहसीलदार गरिमा ठाकुर के यहां आवेदन प्रस्तुत किया। तब उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आवेदन डालिए उनके कहने पर ग्रामीण अनिल धुरी ने पंजीबद्ध प्रकरण . आर. डी..202425400108800008 में आवेदन प्रस्तुत किया। पर तहसीलदार के द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई और नहीं देने पर खारिज कर दिया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत कर बताया है कि आवेदन करने के बाद तहसीलदार गरिमा ठाकुर से सम्पर्क किया तब उन्होंने कहा कि काम जल्दी कराना है तो 10,000/- दस हजार रूपये देना होगा अन्यथा तुम्हारा आवेदन को खारिज कर दूंगी। अनिल धुरी का यह भी आरोप है कि उक्त रकम नहीं दिये जाने के कारण तहसीलदार गरिमा ठाकुर द्वारा सिविल कोर्ट का आदेश को मानते हुए प्रस्तुत किये गये खाता विभाजन हेतु आवेदन को खारिज कर दिया

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दस्तावेजों और प्रकरण का अवलोकन करने पर कुछ और कहानी:–

इस मामले में पूरे प्रकरण का अवलोकन करें तो कुछ और ही कहानी सामने रही है। आवेदक अनिल कुमार धुरी के द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के बाद तहसीलदार गरिमा ठाकुर ने इस संबंध में हल्का पटवारी से जांच प्रतिवेदन मंगवाया। पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में बताया है कि उक्त भूमि स्टेट बैंक में बंधक है और इसमें से कुछ खसरा अन्य नामों से दर्ज दिख रहा है। इसके अलावा खसरा नंबर 591/16 वर्तमान ऑनलाइन अभिलेख में मौजूद नहीं है। दूसरा नंबर 25 /3 बैंक में बंधक है।

इसके अलावा प्रकरण के संबंध में यह भी जानकारी सामने आई कि सिविल कोर्ट के आदेश की अपील हाईकोर्ट में की गई है जिसका कोई निराकरण वर्तमान में नहीं हुआ है और प्रकरण हाई कोर्ट में लंबित है। अब चूंकि हाईकोर्ट में जो प्रकरण लंबित है उस पर निर्णय करना तहसीलदार के क्षेत्राधिकार के बाहर है। अतः तहसीलदार गरिमा सिंह ने अतः तहसीलदार गरिमा सिंह ने इस प्रकरण में अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर नियम विरुद्ध तरीके से आदेश नहीं दिया गया। आवेदक को हाई कोर्ट से प्रकरण के निराकरण और बैंक से बंधक मुक्त होने के बाद पुनः ई– कोर्ट के माध्यम से आवेदन देने को कहा गया। जिससे क्षुब्ध होकर आवेदक के द्वारा तथ्यों को छुपाते हुए उच्च अधिकारियों को झूठी शिकायत कर झूठी खबर चलवा दबाव बनाने और अपने पक्ष में प्रकरण का आदेश करवाने की कोशिश की जा रही है।