
CG Crime News:– पुलिस ने 13 फरवरी को किसान से हुई ढाई लाख रुपये की लूट का पर्दाफाश करते हुए अंतर्राज्यीय उठाईगिरी गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सात वारदातों को अंजाम देकर लगभग 9 लाख 83 हजार रुपये की लूट की, जबकि गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं।
जांजगीर। शिवरीनारायण थाना क्षेत्र के ग्राम धरदेई में 13 फरवरी को दिनदहाड़े किसान से 2.5 लाख रुपये लूटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का जांजगीर पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में कुल सात लूट और उठाईगिरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। इन वारदातों में करीब 9 लाख 83 हजार रुपये की रकम पार करने की बात सामने आई है। पकड़े गए आरोपी बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं। पूरे मामले का खुलासा एसपी विजय कुमार पांडेय एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप ने किया।
मामले की जानकारी देते हुए एसपी विजय कुमार पांडेय ने बताया कि साइबर थाना जांजगीर की त्वरित तकनीकी जांच इस सफलता की अहम कड़ी रही। 13 फरवरी को हुई 2.5 लाख रुपये की लूट के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, जिससे आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
पुलिस के अनुसार गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी बैंक से बड़ी रकम निकालने वाले बुजुर्गों और महिलाओं की रेकी करते थे, फिर उनका पीछा कर सुनसान जगह पर वारदात को अंजाम देते थे। कई मामलों में पीड़ितों को भ्रमित करने के लिए केंवाच पाउडर का भी इस्तेमाल किया जाता था।
यह था पूरा मामला:–
13 फरवरी 2026 को एक किसान ने पामगढ़ स्थित एसबीआई शाखा से 2.5 लाख रुपये निकाले और अपने गांव धरदेई के लिए रवाना हुए। रास्ते में अज्ञात बदमाशों ने पीछा करते हुए साइकिल के पास रखी रकम लूट ली और फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही थाना शिवरीनारायण में अपराध क्रमांक 61/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एसपी विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में साइबर टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप और उप पुलिस अधीक्षक योगिताबाली खापर्डे के नेतृत्व में संभावित मार्गों और घटनास्थल के आसपास गहन जांच की। आईजी राम गोपाल गर्ग भी पूरे प्रकरण में लगातार संपर्क में रहे और जांच के लिए आवश्यक निर्देश देते रहे।
सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में आरोपियों का संबंध बिहार के कटिहार जिले से जुड़ा मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बिहार से बिलासपुर पहुंचे थे और वहीं ठहरे हुए थे। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांजगीर साइबर टीम ने बिलासपुर के सैकड़ों होटल और धर्मशालाओं में पड़ताल की। आईजी के निर्देश पर बिलासपुर पुलिस ने भी सहयोग किया।
जांच के दौरान पुराना बस स्टैंड के समीप एक लॉज में बिहार के कुछ संदिग्धों के ठहरने की जानकारी मिली। साइबर टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने अपना वाहन जिला अस्पताल बिलासपुर की पार्किंग में खड़ा किया था।
इसके बाद पुलिस टीम ग्राहक बनकर पुराना बस स्टैंड क्षेत्र के शिवम राज लॉज पहुंची। वहां कमरे में ठहरे दो व्यक्तियों को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। शुरुआत में वे गुमराह करते रहे, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने 13 फरवरी को ग्राम धरदेई में लूट की घटना को अंजाम देना स्वीकार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बुजुर्गों और महिलाओं को निशाना बनाते थे और बैंक से निकलने के बाद उनका पीछा कर वारदात करते थे। पुलिस ने अन्य जिलों को भी सतर्क किया, जहां से पता चला कि गिरोह ने अंबिकापुर, रायगढ़, सारंगढ़ और कोरबा समेत कई स्थानों पर पूर्व में भी लूट की घटनाएं की थीं।
टीम में यह रहे शामिल:–
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप, प्रभारी निरीक्षक सागर पाठक एवं साइबर थाना जांजगीर की पूरी टीम ने कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। थाना शिवरीनारायण के निरीक्षक राजीव श्रीवास्तव, सउनि राम प्रसाद बघेल सहित अन्य स्टाफ का भी विशेष योगदान रहा।
यह दो आरोपी हुए गिरफ्तार:–
- दीपक यादव, पिता जीवन यादव, उम्र 36 वर्ष, निवासी नया टोला जोराबगंज, थाना कोढ़ा, जिला कटिहार (बिहार)
- अविनाश उर्फ सनी कुमार यादव, पिता रणधीत यादव, उम्र 28 वर्ष, निवासी नया टोला जोराबगंज, थाना कोढ़ा, जिला कटिहार (बिहार)
दो अन्य मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
जप्त सामग्री:–
मोटरसाइकिल पल्सर (काला-लाल) नंबर CG07CD1988
मोटरसाइकिल ग्लैमर (नीला-काला) नंबर CG10AK1805
चार फर्जी आधार कार्ड
तीन फर्जी मोबाइल फोन
केंवाच पाउडर
10,500 रुपये नगद
जांजगीर पुलिस की अपील:–
जनता से अपील:
बैंक से बड़ी रकम निकालते समय सावधानी बरतें।
अनजान लोगों से लेन-देन या जानकारी साझा न करें।
संभव हो तो RTGS, IMPS या UPI जैसे डिजिटल माध्यम का उपयोग करें।
बड़ी राशि निकालते समय किसी विश्वसनीय व्यक्ति को साथ रखें। बैंक परिसर में खुले में नकदी न गिनें।
अजनबियों की मदद की पेशकश से सतर्क रहें।
बैंक के बाहर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें।
बाहर निकलते समय सुनिश्चित करें कि कोई पीछा तो नहीं कर रहा।
नकदी को खुले में बाइक या हाथ में प्रदर्शित न रखें।
यदि किसी प्रकार का संदेह हो तो तत्काल नजदीकी थाना या भीड़भाड़ वाले सुरक्षित स्थान पर पहुंचें।

Leave a Reply