कोरबा में बिना पंजीयन चलता रहा CBCT सेंटर, कॉमर्स छात्रा कर रही थी मरीजों की जांच

कोरबा, 21 जुलाई 2026। कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। शहर में लगभग एक वर्ष से एक निजी CBCT (Cone Beam Computed Tomography) सेंटर बिना नर्सिंग होम एक्ट के पंजीयन के संचालित होता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि सेंटर में पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में कॉमर्स की एक छात्रा मरीजों की जांच कर रही थी। शिकायत के बाद जब स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की तैयारी की, तो महज 15 मिनट के भीतर सेंटर बंद कर दिया गया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि कार्रवाई की जानकारी सेंटर संचालकों तक पहले कैसे पहुंची।

यह मामला कोरबा शहर के शारदा विहार पेट्रोल पंप के पास संचालित सर्वमंगला CBCT सेंटर का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सेंटर का संचालन दुर्ग के एक रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर किया जा रहा था, लेकिन मौके पर न तो संबंधित डॉक्टर मौजूद मिले और न ही कोई अधिकृत तकनीकी विशेषज्ञ। कई दिनों की पड़ताल में हर बार एक युवती ही मशीन संचालित करते हुए मिली। पूछताछ में उसने बताया कि डॉक्टर बाहर रहते हैं और मशीन का संचालन वही करती है।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित सेंटर जिला स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत ही नहीं था। इसके बावजूद यहां मरीजों की जांच लगातार की जा रही थी। इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत मिलने के बाद नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. अतीक सिद्दीकी ने बिना रेडियोलॉजिस्ट के सेंटर संचालन को नियमों के विरुद्ध बताते हुए जांच का आश्वासन दिया। लेकिन शिकायत के मात्र 15 मिनट बाद ही सेंटर में ताला लग गया और वहां मौजूद कर्मचारी भी गायब हो गए। वर्तमान में मरीजों को सेंटर एक सप्ताह तक बंद रहने की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि कार्रवाई से पहले सेंटर संचालकों को सूचना किसने दी।

  रायपुर की राजनीति में अब महिला अध्यक्ष की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केसरी ने बताया कि शिकायत मिलते ही जांच के निर्देश दिए गए थे। वहीं नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया कि संबंधित CBCT सेंटर नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं था। जब विभागीय टीम मौके पर पहुंची, तब तक सेंटर बंद हो चुका था।

गौरतलब है कि CBCT एक अत्याधुनिक 3D इमेजिंग तकनीक है, जिसका उपयोग दंत चिकित्सा, जबड़े की बीमारियों, इम्प्लांट प्लानिंग और मैक्सिलोफेशियल जांच में किया जाता है। नियमों के अनुसार ऐसे सेंटर का विधिवत पंजीयन, प्रशिक्षित रेडियोग्राफर द्वारा मशीन का संचालन, पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट द्वारा रिपोर्ट का सत्यापन तथा AERB के रेडिएशन सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा मशीन संचालित करना मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।

अब यह मामला केवल एक अवैध CBCT सेंटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, निरीक्षण प्रणाली और नर्सिंग होम एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि विभाग केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाता है या जिले में संचालित अन्य निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की भी व्यापक जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करता है।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*


This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.