SDM Karun Dahariya: लगातार विवादों में रहे एसडीएम करुण डहरिया, कभी छात्रों से की मारपीट तो कभी रिश्वत लेते धराएं, विवादित अधिकारी को कलेक्टर ने बनाया था एसडीएम,फिर फंस गए हत्या में,अब सस्पेंड

SDM Karun Dahariya: छत्तीसगढ़ में प्रशासन और जनता के रिश्ते पर फिर एक सवाल खड़ा हुआ है। बलरामपुर जिले के कुसमी में अवैध बॉक्साइट खनन की जांच के दौरान हुई कथित मारपीट में एक 60 वर्षीय ग्रामीण की मौत हो गई। सरकार ने कार्रवाई करते हुए कुसमी के विवादित SDM करूण डहरिया को निलंबित कर दिया है।

SDM Karun Dahariya: रायपुर। हंसपुर गांव। शाम ढल रही थी। खेतों से लोग लौट रहे थे। गेहूं की सिंचाई कर घर जा रहे तीन ग्रामीणों को शायद अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनकी जिंदगी बदल जाएगी। आरोप है कि अवैध खनन की जांच के नाम पर पहुंचे विवादित SDM करूण डहरिया और उनके साथ मौजूद लोगों ने उन्हें रोका, सवाल पूछे और फिर रॉड-डंडों से पीटना शुरू कर दिया।

इस मारपीट में रामनरेश राम (60 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अजीत उरांव और आकाश अगरिया घायल हैं।

ग्रामीणों का कहना है—वे खेत से लौट रहे थे। रात करीब आठ बजे दो गाड़ियों में सवार 6-7 लोगों ने उन्हें रोका। पूछताछ हुई। और फिर पिटाई। सवाल यह है कि जांच करने गई टीम के पास लाठी और रॉड क्यों थे?

घटना की परतें और उठते सवाल

बताया जा रहा है कि विवादित SDM निजी थार वाहन से पहुंचे थे। उनके साथ राजस्व विभाग का नियमित अमला नहीं था, बल्कि निजी लोग थे। यह भी कहा जा रहा है कि घटना के बाद अन्य अधिकारियों को बुलाकर पूरी कार्रवाई को आधिकारिक रंग देने की कोशिश हुई।

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अगर यह अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई थी, तो प्रक्रिया कहां थी? सरकारी गाड़ी कहां थी? राजस्व टीम कहां थी? और निजी लोग क्यों थे?

मामला कुसमी थाना क्षेत्र में दर्ज है। ग्रामीणों के विरोध और बढ़ते दबाव के बाद विवादित SDM समेत चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया। सरकार ने निलंबन का आदेश जारी कर दिया है।

एक की मौत, दो घायल

रामनरेश राम अब नहीं रहे। अजीत उरांव और आकाश अगरिया अस्पताल में हैं। एक परिवार शोक में है। गांव में तनाव है। प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन क्या जवाबदेही तय होगी?

विवादों से पुराना नाता

विवादित SDM करूण डहरिया का नाम इससे पहले भी कई विवादों में आ चुका है। 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी डहरिया जांजगीर-चांपा में छात्रों के साथ विवाद के कारण सुर्खियों में रहे। इसके बाद गरियाबंद में जनपद पंचायत सीईओ रहते हुए नलकूप बोरवेल के बिल पास करने के एवज में रिश्वत लेने के आरोप में नवंबर 2022 में उन्हें एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ लिया था।

बलरामपुर की यह घटना न केवल विवादित SDM के प्रशासनिक आचरण पर सवाल खड़े करती है, बल्कि राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी गंभीर बहस शुरू कर देती है। अब सबकी नजर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है

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