600 साल की परंपरा पर नाम बदलने के विवाद का पटाक्षेप ! मुरिया दरबार को लेकर प्रशासन ने साफ किया नहीं बदला है नाम, 23 अक्टूबर को आयोजन

बस्तर। बस्तर दशहरा की पहचान सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यहां की परंपराएं, स्थानीय समाज की भागीदारी और पीढ़ियों से चली आ रही व्यवस्थाएं इस उत्सव को देशभर में विशिष्ट बनाती हैं। इसी विरासत का अहम हिस्सा मुरिया दरबार इन दिनों नाम परिवर्तन की चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक कार्यक्रम सूची में इसका नाम ‘मुरिया दरबार’ ही दर्ज है और प्रशासन ने नाम बदले जाने की खबरों को निराधार बताया है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 23 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे जगदलपुर के सिरहासार भवन में मुरिया दरबार आयोजित होगा। इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब आधिकारिक सूची में पुराना नाम ही मौजूद है, तो नाम बदलने की चर्चा किस आधार पर शुरू हुई?

मुरिया दरबार सिर्फ आयोजन नहीं, संवाद की परंपरा

बस्तर दशहरा की परंपरा लगभग छह शताब्दियों से चली आ रही मानी जाती है। इसकी खासियत यह है कि उत्सव में स्थानीय देवी-देवताओं, पारंपरिक व्यवस्थाओं और समुदाय की भागीदारी को विशेष स्थान मिलता है। मुरिया दरबार भी इसी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा है। यहां स्थानीय समाज से जुड़े मुद्दों और अपेक्षाओं को सामने रखने की परंपरा रही है।

इसलिए मुरिया दरबार के नाम को लेकर उठी चर्चा केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। यह बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर जानकारी सामने आना जरूरी है, ताकि किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानकर आगे न बढ़ाया जाए।

कथित ‘आम दरबार’ वाले दस्तावेज पर सवाल

नाम परिवर्तन को लेकर उठे विवाद में कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी की आपत्ति और नाम बहाल करने की मांग की खबरें भी सामने आई हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि नाम बदलने की खबरें निराधार हैं। उपलब्ध कार्यक्रम सूची में ‘मुरिया दरबार’ का उल्लेख इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्य है।

यदि किसी अन्य पर्चे या कार्यक्रम विवरण में ‘आम दरबार’ लिखा गया था, तो उसकी मूल प्रति, जारी होने की तारीख और संबंधित कार्यालय की पुष्टि सामने आनी चाहिए। इससे पता चल सकेगा कि वह आधिकारिक दस्तावेज था, प्रारंभिक मसौदा था या किसी स्तर पर हुई त्रुटि। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से किसी औपचारिक सरकारी आदेश द्वारा नाम बदले जाने की पुष्टि नहीं होती।

  KORBA:एक साल में कर्जदार से लखपति बना डायरेक्टर तो कैशियर ने बना लिया तीन मंजिला भव्य मकान 

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की प्रस्तावित मौजूदगी से बढ़ा आयोजन का महत्व

इस वर्ष बस्तर दशहरा के आयोजन को लेकर विशेष चर्चा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रस्तावित मौजूदगी के संदर्भ में यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति संबंधी अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के लिए भी बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को सामने रखना महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, आयोजन की अहमियत के बीच नाम परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चा का समाधान राजनीतिक आरोपों से अधिक मूल दस्तावेजों और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही निकल सकता है।

अफवाह या दस्तावेजी भ्रम? तथ्यों से स्पष्ट होगी तस्वीर

सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस के दौर में किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी है। बस्तर की अस्मिता से जुड़े विषय पर न तो अपुष्ट दावे को अंतिम सच माना जाना चाहिए और न ही बिना प्रमाण किसी पक्ष पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया जाना चाहिए। यदि कोई दस्तावेज विवाद की वजह बना है, तो उसे सार्वजनिक करने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल आधिकारिक कार्यक्रम सूची में 23 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे सिरहासार भवन में मुरिया दरबार का आयोजन दर्ज है। प्रशासन ने नाम परिवर्तन की खबरों को निराधार बताया है। अब विवाद से जुड़े कथित दस्तावेज की प्रमाणिकता सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि नाम बदलने की चर्चा किस वजह से उठी।

बस्तर की विरासत का सम्मान जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर चलने वाली हर चर्चा का आधार भी प्रमाणिक होना चाहिए। मुरिया दरबार को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड और तथ्यों से ही मिलना चाहिए।

संदर्भ: बस्तर जिला प्रशासन की संस्कृति एवं विरासत संबंधी जानकारी | भारत सरकार का पर्यटन पोर्टल: बस्तर दशहरा

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*


This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.