ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव – 20 टन की क्षमता, 40 टन का बोझ


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क्षेत्र में निर्माण सामग्री से लदे डंपरों ने सड़कें की तबाही तय की,जिम्मेदार खामोश

बिलासपुर / बेलगहना सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग कहानी बयां कर रही है। बेलगहना क्षेत्र की ग्रामीण सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही से विकास की नींव पर ही खतरा मंडरा रहा है।

हालात ये हैं कि जिन सड़कों की अधिकतम भार क्षमता 15 से 20 टन है, उन पर प्रतिदिन 35 से 40 टन क्षमता वाले भारी वाहन दौड़ रहे हैं। नतीजतन, चंद महीनों में बनी सड़कें चंद दिनों में उखड़ने लगी हैं और शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठे हैं।

सडक सामग्री ले जा रहे भारी वाहन बने सड़क के दुश्मन

कोटा विकासखंड अंतर्गत बेलगहना तहसील, क्षेत्र में इन दिनों निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर डामर, गिट्टी और अन्य सामग्री का परिवहन किया जा रहा है।
इस कार्य के लिए हाईवा और डंपर जैसे भारी वाहन उपयोग में लाए जा रहे हैं, जो प्रतिदिन 60 से अधिक चक्कर लगाते हैं। यह पूरी गतिविधि ग्रामीण सड़कों पर हो रही है, जो इस भार को सहने में पूरी तरह अक्षम हैं।

20 टन क्षमता वाली सड़क पर 40 टन का दबाव

जानकारों की मानें तो बेलगहना से लुफा और कोटा से पंडरा पथरा मार्ग जैसी सड़कों की अधिकतम भार क्षमता लगभग 20 टन है। लेकिन मौजूदा स्थिति में इन पर 40 टन तक के वाहन तेज़ रफ्तार से दौड़ रहे हैं, जिससे सड़कों की सतह दरकने लगी है और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।

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सड़क निर्माण कार्य के कारण बेलगहना-लुफा मार्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। हाल ही में एक हाइवा वाहन अनियंत्रित होकर एक किराना दुकान में घुस गया,

ग्रामीणों की नाराज़गी और चेतावनी

भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए।

परिवहन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

सड़क निर्माण के बाद उसकी देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी तय की जाए

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस समस्या को जल्द नहीं रोका गया, तो जल्द ही यह पूरी सड़कें जर्जर हो जाएंगी। उनका आरोप है कि –

जिम्मेदार अधिकारी खामोश
इस गंभीर स्थिति के बावजूद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY ) और लोक निर्माण विभाग (PWD) इस विषय में अनभिज्ञता का दिखावा कर रहा है। वहीं, निर्माण कार्य में लगी ठेकेदार कंपनियां भी नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से कार्य कर रही हैं।

अगर यही स्थिति बनी रही, तो सड़कें एक-दो मौसम भी नहीं झेल पाएंगी और सरकार की करोड़ों की योजनाएं ज़मींदोज़ हो जाएंगी। ग्रामीणों की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है कि सड़कों पर वाहनों की क्षमता का कड़ाई से पालन हो, ताकि यह विकास की राह बनी रहे, विनाश की नहीं।