Bilaspur High Court News:– भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित होने के बाद,अपराध के मामले में दोष मुक्त होने पर भी कर्मचारी पिछले बकाए वेतन का हकदार नहीं


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Bilaspur High Court News:– हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कर्मचारी को भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित किया गया है और बाद में वह दोषमुक्त भी हो गया है तो उस पर मौलिक नियमों के नियम 54 बी के तहत बरी होने पर निलंबन अवधि का वेतन पाने का अधिकार नहीं होगा।

Bilaspur बिलासपुर। हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि कर्मचारी को किसी अपराध से बरी करने के बाद भी उसे पिछले वेतन का हकदार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कर्मचारी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कर्मचारी ने याचिका में कहा था कि वह मौलिक नियमों के नियम 54-बी के तहत बरी होने पर पिछला वेतन पाने का हकदार था।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला यह नहीं है कि उसे निलंबित किया और बाद में निलंबन रद्द करते हुए बहाल करने का निर्देश दिया गया। बल्कि निचले कोर्ट द्वारा आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, इसलिए मौलिक नियमों का नियम 54-बी लागू नहीं होगा।

बरी होने के बाद लगाई याचिका:–

याचिकाकर्ता राम प्रसाद नायक राज्य विद्युत वितरण कंपनी में पर्यवेक्षक (सिविल) के पद पर कार्यरत था। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। हालांकि तीन साल के भीतर मुकदमा समाप्त नहीं हो सका, इसलिए निलंबन रद्द कर दिया गया। बाद में, विशेष न्यायाधीश रायपुर की अदालत ने याचिकाकर्ता को दोषी ठहराया और उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उसने उक्त सजा के खिलाफ अपील की और बाद में उसे बरी कर दिया। इस बीच वह सेवानिवृत्त हो गया। बरी होने के बाद, याचिकाकर्ता ने पिछले वेतन की मांग करते हुए कई अभ्यावेदन किए। पिछला वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।