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धमतरी । छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और निष्पक्ष शासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए विभिन्न जिलों में दर्ज 103 गैर-गंभीर राजनीतिक प्रकरणों की वापसी का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जिलों से प्राप्त रिपोर्ट और विस्तृत समीक्षा के बाद मंत्रीमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा पर यह फैसला लिया गया। न्यायालय से विधिवत स्वीकृति मिलने के पश्चात 41 प्रकरणों में अभियुक्तों को राहत प्रदान की गई और संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से उनके नाम हटा दिए गए।
धमतरी जिले के 2 प्रकरण को वापस लिया गया है। आरोपीगण द्वारा ग्राम बाजारकुर्रीडीह में धान खरीदी केंद्र खोलने एवं कुकरेल से बिरझुरी तक डामरीकरण सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्काजाम एवं आवागमन बाधित करने के कारण अनीता ध्रुव, राज बाई ध्रुव, देवकी ध्रुव, वामन साहू, अजय यादव, मोहनदास मानिकपुरी, सुखराम साहू, चिंताराम ध्रुव, रोमन साहू, संतोष यादव, राजेंद्र साहू, भुनेश ध्रुव, सत्यवान मरकाम, मीनेश ध्रुव, भगवान सिंह सिंहा और नरेंद्र चंद्राकर के खिलाफ अपराध क्रमांक 40/22 पंजीबद्ध किया गया था। न्यायालय द्वारा दिनांक 28 फरवरी 2025 को प्रकरण वापस लिया गया। वहीं अनुराम चंद्राकर और विजय मोटवानी द्वारा शासकीय कार्य में बाधा डालने के कारण अपराध क्रमांक 467/22 पंजीबद्ध किया था, जिसे न्यायालय द्वारा 27 फरवरी 2025 को वापस लिया गया।
उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की सरकार सुशासन की सरकार है। हमारी सरकार में किसी भी निर्दोष के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में कई ऐसे राजनीतिक प्रकरण दर्ज किए गए थे, जो केवल लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा थे। हमारी सरकार की नीति हमेशा यही रही है कि राजनीतिक कारणों से किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमों में न फंसाया जाए। इसलिए हमारी सरकार ने निष्पक्षता के साथ इन मामलों की समीक्षा कर ऐसे सभी गैर-गंभीर मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री शर्मा ने आगे कहा कि हमारी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और किसी भी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। यह निर्णय न केवल न्यायसंगत है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। विपक्ष की तुष्टिकरण और दमनकारी नीतियों के विपरीत, हमारी सरकार पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन में विश्वास रखती है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रकरण कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले या हिंसक गतिविधियों से जुड़े हुए थे, उनकी समीक्षा अलग प्रक्रिया के तहत की गई है। लेकिन जिन मामलों में केवल राजनीतिक विरोध या लोकतांत्रिक आंदोलन हुआ था और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई थी, उन्हें न्यायालय से स्वीकृति प्राप्त कर वापस लिया गया है। हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है हम जनता के हक की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की भावना को मजबूत करेंगे और राजनीतिक द्वेष के आधार पर लिए गए निर्णयों को सुधारेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार जनता की सरकार है और हम किसी भी निर्दोष व्यक्ति पर बेवजह कानूनी बोझ नहीं डालने देंगे।
राजनीतिक प्रकरणों की वापसी एक विस्तृत और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले राज्य शासन द्वारा सभी जिलों में दर्ज राजनीतिक प्रकरणों की समीक्षा की जाती है। गृह विभाग द्वारा संबंधित जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से मामले गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और जिनमें हिंसक घटनाएं शामिल नहीं हैं। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा उपरांत, प्रकरण को मंत्रिपरिषद में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है। अनुमोदन प्राप्त होने के बाद न्यायालय में प्रकरण वापसी का आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। न्यायालय द्वारा इस मामले की विधिवत समीक्षा के उपरांत अभियुक्तों को राहत प्रदान करने की अनुमति दी जाती है। न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से अभियुक्तों के नाम हटा दिए जाते हैं और उन्हें विधिवत मुक्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। शासन स्तर पर इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान हो और राजनीतिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न कानूनी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
