प्रधान मंत्री की घोषणा … लालकृष्ण आडवानी को भारत रत्न…त्वरित आलेख… चितरंजय पटेल


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भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर जानकारी दी है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता, भूतपूर्व गृह मंत्री एवम् उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं जिनका भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रधानमंत्री द्वारा लालकृष्ण आडवाणी को सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने की घोषणा करना सामयिक और स्वागतेय है। चूंकि देश जब अयोध्या धाम में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के एतिहासिक और अविस्मरणीय पलों से गुजर रहा हैं तब श्री राम मंदिर आंदोलन के प्रणेता बनकर पूरे देश में सौगंध राम की खाते हैं , मंदिर वहीं बनाएंगे… का शंखनाद करने की हिम्मत दिखाने वाले राजनेता लालकृष्ण आडवाणी ही हैं जिन्होंने संपूर्ण सनातन समाज के आराध्य श्री राम लला को उनके जन्म स्थान का हक दिलाने समग्र हिंदू जागरण हितार्थ राम रथ यात्रा लेकर निकल पड़े जहां इस आंदोलन में सारथी के रूप में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी पल पल उनके साथ रहे।
श्री राम मंदिर आंदोलन के राम रथ यात्रा को मिल रहे अपार समर्थन को लेकर तब मुस्लिम परस्त सरकारों पर बढ़ते दबाव से हिंदू विरोध की प्रतिस्पर्धा में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने राम रथ यात्रा को रोक समस्तीपुर में गिरफ्तार कर दुमका (झारखंड) में नजरबंद कर दिया गया और राम रथ यात्रा अयोध्या पहुंचने के पूर्व ही बाधित हो गई जिससे समग्र हिंदू समाज में व्याप्त आक्रोश ने पूरे देश के साथ उत्तर प्रदेश की सियासी तस्वीर और तकदीर दोनों बदल कर रख दी।
परिणाम स्वरूप जहां देश में पिछड़ों को लेकर देश में जब मंडल आयोग राजनीति चल रही थी तो हिंदू जागरण के नाम पर मंडल बनाम कमंडल की सियासत तेज हो गई पश्चात उत्तर प्रदेश में राजनीति की दिशा ही पलट गई और १९९१ में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की अगुवाई में प्रथम बार भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाई जो मंदिर आंदोलन के नाम पर सरकार शहीद भी हो गई लेकिन तब से आज तक देश में सरकार की दिशा तय करने वाले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अपने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण करने की प्रतिबद्धता के साथ कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और भा ज पा बनाम शेष राजनीतिक दलों के गणित भी हिंदुत्व की ताकत को कम नहीं कर सके और इसी महाअस्त्र के साथ मोदी ने २०१४ में उत्तरप्रदेश के काशी की सरजमीं से देश की सत्ता की बागडोर संभाली। फिर मोदी और अमित शाह की जोड़ी के साथ योगी के प्रबल राष्ट्रवाद के साथ हिंदुत्व के भाव ने उत्तरप्रदेश के साथ देश में पुनः भारतीय जनता पार्टी को सत्ता की बागडोर सौंपा और अधिक ताकत के साथ मोदी देश के पुनः प्रधानमंत्री बने तो वहीं योगी आदित्य नाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की दुबारा कुर्सी संभाली और लालकृष्ण आडवाणी के श्री राम मंदिर निर्माण के शंखनाद को धरातल पर फलीभूत करने का अवसर आया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ कोरोना के महामारी के बीच श्री राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन मोदी और योगी की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। तदपश्चात देश भर के लोगों ने श्री राम मंदिर निर्माण के लिए मुक्त हस्त से दान किए, तब जन जन के राम को उनके जन्म स्थान पर प्राण प्रतिष्ठित करने की अविस्मरणीय बेला भी आया जब दुनिया भर के साधु संतो, मठ मंदिरों के पुजारी, देश के महान हस्तियों के सम्मुख २२ जनवरी को राम लला को उनका जन्म स्थान मिला और देश के साथ पूरा विश्व राम मय हो गया… और एक बार फिर पूरे विश्व समुदाय ने पूरी ताकत से राम को आदर्श मान कर आत्मसात कर लिया …तब स्थापित हो गया कि राम व्यक्ति नहीं, आराध्य से भी बढ़कर राम का नाम ही जीवन दर्शन है जिसे स्वीकारने से संपूर्ण मानवता का उद्धार संभव है।
इस व्यापक जन समर्थन से सशक्त होकर राजनीति के चतुर सुजान नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक मार्गदर्शक और राम मंदिर आंदोलन के प्रणेता लालकृष्ण आडवानी को भारत रत्न से सम्मान करने का सही, सटीक और तार्किक निर्णय लेकर सबको एक बार फिर चौंका दिया और बता दिया कि जो राम को लाए हैं हम उनको लायेंगे।
प्रधानमंत्री का यह निर्णय इसलिए भी चौंकाने वाला है कि राजनीतिक पटल पर उनके तथाकथित विरोधीयों के द्वारा अक्सर यह बात कही जाती रही है कि मोदी ने अपने गुरु आडवाणी को ही किनारे लगा दिया जबकि मोदी ने आडवाणी के प्रति आभार और शिष्टाचार को हमेशा जिंदा रखा और लालकृष्ण आडवानी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा कर एक तरह से आज उनके धुर विरोधी भी घायल नजर आ रहे हैं। एक तीर से कई निशाने साधने में माहिर नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देकर राम मंदिर आंदोलन में आडवाणी जी की भूमिका को सही समय में सही सम्मान देकर अपना कर्तव्य निभाया तो वहीं इस राम मय पलों में इस निर्णय के प्रति लोगों के कदाचित विरोध से भी बच गए क्योंकि आज राम मय संपूर्ण भारत का एक ही कहना है जो राम को लाए हैं उन्हें हम लायेंगे…तो एक बार फिर…तय मोदी…जय मोदी।

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