कोरबा: “जनदर्शन में शिकायत बेअसर”, डिंकी कौर ने पूछा- आखिर किसके संरक्षण में चल रहा बोरिंग का खेल?

एक ही जगह दोबारा बोरिंग करने पर उठे सवाल, सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक मामला ले जाने की चेतावनी

कोरबा-बांकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा के कटाईनार (वार्ड क्रमांक 14) में पेयजल संकट और बोरिंग कार्य को लेकर भड़का विवाद अब और गहरा गया है। समाजसेविका डिंकी कौर द्वारा उठाए गए सवालों और कलेक्टर जनदर्शन में की गई शिकायत पर प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

समाजसेविका डिंकी कौर ने सीधा आरोप लगाया है कि कई बार लिखित आवेदन देने, जनदर्शन में शिकायत करने और मामला पूरी तरह सार्वजनिक होने के बावजूद आज तक न तो इस विषय की निष्पक्ष जांच हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने जवाब देना उचित समझा।

लापरवाही का खेल: पहला बोर फेल, अब कुछ ही दूरी पर फिर खुदाई

डिंकी कौर ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि:

कुछ समय पहले जिस बोर को बड़े दावों के साथ खोदा गया था, वह मात्र एक-दो दिन में ही सूख गया (जवाब दे गया)।

अब उसी फेल हो चुके बोर से कुछ ही दूरी पर दोबारा नया बोर खोदा जा रहा है।

यदि पहली बार में ही सही तकनीकी जांच और पर्याप्त गहराई तक बोरिंग कराई जाती, तो जनता की गाढ़ी कमाई के सरकारी धन को दोबारा इस तरह पानी की तरह बहाने की नौबत नहीं आती।

???????? डिंकी कौर के प्रशासन से सीधे सवाल:

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जवाबदेही किसकी?: एक सरकारी बोर फेल होने की जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी या ठेकेदार की है?

जांच क्यों नहीं?: सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी परिणाम शून्य क्यों रहा? क्या पहले हुए कार्य की कोई तकनीकी जांच होगी?

प्रशासन मौन क्यों?: जब सीधे कलेक्टर जनदर्शन में इसकी शिकायत की जा चुकी है, तो प्रशासन आखिर किसके दबाव में मौन बैठा है?

“शिकायतों पर कार्रवाई न होने के कारण ही गैरजिम्मेदार लोगों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं। जब काम जनता के पैसों से हो रहा है, तो उसकी शत-प्रतिशत जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।”

— डिंकी कौर, समाजसेविका

???????? मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचेगा भ्रष्टाचार का यह मामला

डिंकी कौर ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वह इस लड़ाई को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगी। वह इस भ्रष्टाचार की पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, संबंधित विभागों और सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजेंगी ताकि इस मुद्दे की उच्चस्तरीय जांच हो सके।

बड़ा सवाल: आखिर प्रशासन जागेगा कब?

अब यह मामला सिर्फ एक वार्ड की पानी की समस्या या एक बोरिंग तक सीमित नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही और ‘कलेक्टर जनदर्शन’ की प्रभावशीलता पर बड़ा सवालिया निशान है। वार्डवासी अब यह जानना चाहते हैं कि स्थानीय प्रशासन खुद जांच की जहमत उठाएगा या फिर मुख्यमंत्री और पीएमओ से आदेश आने के बाद ही कुंभकर्णी नींद से जागेगा?

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