कोरबा: तस्करों के हवाले लेमरू के जंगल! ग्रामीणों ने आधी रात को पकड़ी लकड़ी तस्करी, तब खुली वन अमले की नींद

राजू खान नामक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध; 12 दिनों से चल रहा था खेल, विभाग ने की खानापूर्ति।

मशीन से काटे जा रहे थे सेमल के हरे-भरे पेड़, ट्रैक्टर और 6-चक्का ट्रक समेत भारी मात्रा में लकड़ी ज़ब्त।

कोरबा:

वन मंडल कोरबा के जंगलों को चोरों और तस्करों के हवाले छोड़कर मैदानी अमला चैन की बंशी बजा रहा है। कटघोरा और कोरबा, दोनों ही वन मंडलों का हाल बेहाल है, जहां बड़े पैमाने पर हरे-भरे वृक्षों की अवैध कटाई कर तस्करी की जा रही है, लेकिन वन विभाग की कार्रवाई नगण्य है।

ताजातरीन मामला कोरबा वन मंडल के लेमरू वन परिक्षेत्र अंतर्गत लामपहाड़-बड़गांव क्षेत्र का है। यहाँ कक्ष क्रमांक पी 862 में पिछले 12 दिनों से हरे-भरे वृक्षों को काटा जा रहा था, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब जागरूक ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालकर इस संगठित रैकेट को बेनकाब किया। बारात की गाड़ी और खराब रास्ते ने खोला ‘महाघोटाले’ का राज

क्षेत्र के एक सक्रिय ग्रामीण ने बताया कि जंगल में मशीन के जरिए वृक्षों की कटाई की भनक उन्हें 26 मई को ही लग गई थी। शुरुआत में लगा कि यह वन विभाग का कोई वैध काम होगा।

किंतु, अगले दिन क्षेत्र में एक बारात के दौरान जब ग्रामीणों को यह संदेश मिला कि “लामपहाड़ के रास्ते से बोलेरो मत लाना, क्योंकि लकड़ी ढुलाई में लगे भारी ट्रैक्टरों के कारण पूरा रास्ता दलदल और खराब हो चुका है”, तब ग्रामीणों का माथा ठनका। रास्ते में कई संदिग्ध बाइक, ट्रैक्टर और ट्रकों के खड़े होने की सूचना पर ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाई और मौके पर धावा बोल दिया। वहाँ पिछले 12 दिनों से सेमल के विशालकाय वृक्षों को काटकर खपाने का खेल चल रहा था।

???? राजू खान का नाम आया सामने, सरपंच ने कहा- “मैंने कोई परमिशन नहीं दी”

जब ग्रामीणों ने मौके पर जांजगीर जिले के पासिंग वाहनों और ट्रैक्टर चालकों को घेरा, तो उन्होंने बताया कि उन्हें लेमरू निवासी राजू खान ने लकड़ी लोड करने भेजा है।

धमकी और कोरे कागज: ग्रामीणों ने जब राजू खान से बात की, तो उसने लकड़ियों को रायपुर ले जाने की बात कही और अकड़ दिखाते हुए कहा कि किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है। उसने ग्राम पंचायत के सरपंच से अनुमति होने का दावा किया।

सरपंच का खंडन: जब ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत बड़गांव के सरपंच ओकेश्वर पैकरा से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी तरह की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। पोल खुलती देख तस्करों द्वारा ग्रामीणों को धमकी-चमकी भी दी गई। वाहन चालकों के पास कागजात के नाम पर सिर्फ दो कोरे (खाली) कागज थे।

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???? बीटगार्ड का अजीब दावा: “मैं घूम कर आया, मुझे कुछ नहीं दिखा”

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब ग्रामीणों ने मोबाइल पर संबंधित बीटगार्ड सुखसागर से बात की, तो उसका जवाब गैर-जिम्मेदाराना था। बीटगार्ड ने कहा कि वह लामपहाड़ का दौरा करके लौटा है, लेकिन उसे ऐसा कुछ नजर नहीं आया।

इस पर ग्रामीण भड़क गए और सवाल दागा कि जिस क्षेत्र में 12 दिनों से कटर मशीनों से पेड़ गिराए जा रहे हों, भारी वाहन चल रहे हों, वहाँ के जिम्मेदार गार्ड को कुछ दिखाई क्यों नहीं दिया? ग्रामीणों के बढ़ते दबाव और तस्करी रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद, वन अमला मजबूरी में हरकत में आया।⚙️ तस्करी का ‘स्मार्ट’ रूट: दुर्गम रास्तों से मैदान तक ऐसे पहुँचती थी लकड़ी

ग्रामीणों के अनुसार, तस्करों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया था:

कटाई: जंगल के भीतर कटर मशीनों से बड़े-बड़े पेड़ों को गिराया जाता था।

प्राइमरी ट्रांसपोर्ट: धमकीटिकरा से लाम पहाड़ तक के 3-4 किलोमीटर के बेहद कठिन और घाटी वाले रास्ते से लकड़ियों को ट्रैक्टरों के जरिए खींचकर मुख्य सड़क तक लाया जाता था।

फाइनल ट्रांसपोर्ट: मुख्य सड़क पर आते ही लकड़ियों को बड़ी पिकअप और 6-चक्का मालवाहकों में लादकर रायपुर व अन्य ठिकानों के लिए रवाना कर दिया जाता था।

???? दो भारी वाहन और लकड़ी ज़ब्त, रफा-दफा करने की आशंका!

ग्रामीणों की सक्रियता के बाद परिक्षेत्र सहायक बड़गांव और परिसर रक्षक बड़गांव (रेंज लेमरू) की संयुक्त टीम ने 27 मई की रात करीब 8:30 बजे जब्ती की औपचारिकता पूरी की।

मौके से 6-चक्का टाटा 1916 वाहन (क्रमांक CG 11 BN 8798) और एक ट्रैक्टर को अवैध सेमल लकड़ियों के साथ ज़ब्त कर लेमरू रेंज कार्यालय लाया गया है।

बड़ा सवाल: क्या मुख्य सरगना बच निकलेंगे?

ग्राम पंचायत बड़गांव (तहसील अजगरबहार) के ग्रामीणों की जागरूकता से करोड़ों की वन संपदा की चोरी तो उजागर हो गई, लेकिन अब सवाल यह है कि इस मामले में असली आरोपियों (माफियाओं) पर कार्रवाई होगी या वन विभाग हमेशा की तरह छोटे ड्राइवरों पर केस बनाकर मामले को रफा-दफा कर देगा?

चर्चा है कि पड़ोसी जिलों के तस्कर स्थानीय रसूखदारों और वन विभाग के कुछ भ्रष्ट मैदानी अमले की मिलीभगत से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। ईमारती और औषधीय महत्व के वृक्षों की ऐसी ही अवैध कटाई जिले के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी धड़ल्ले से जारी है, जिस पर तत्काल कड़े एक्शन की दरकार है।

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