आरटीई के तहत प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द, 3.63 लाख से अधिक बच्चों को मिल रहा लाभ

रायपुर, 06 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके तहत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी पात्र बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। आरटीई अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है, जिसके बदले राज्य सरकार प्रति छात्र के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि प्रदान करती है।

प्रदेश में वर्ष 2011-12 से कक्षा 1 से 5 तक 7,000 रुपये तथा कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है, जो कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष मानी जा रही है। वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आरटीई के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि इस वर्ष कक्षा पहली की करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।

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शासन ने स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करने या प्रक्रिया में बाधा डालने वाले निजी विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस विषय में फैल रही भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

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