आयुष्मान हॉस्पिटल में इलाज को लेकर विवाद, नवजात की मौत के बाद पुलिस जांच शुरू

कोरबा 19 जुलाई 2026। कोरबा में एक निजी अस्पताल में जुड़वा नवजात बच्चों के इलाज को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय रहते सही इलाज और रेफर नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण एक नवजात की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर हालत में बिलासपुर के अस्पताल में भर्ती है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच तीखी बहस के साथ धक्का-मुक्की की भी स्थिति बन गई। घटना की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। करीब 16 साल बाद परिवार में संतान आने से खुशी का माहौल था। परिजनों का कहना है कि जन्म के कुछ घंटे बाद ही एक बच्चे में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसकी जानकारी तत्काल अस्पताल के डॉक्टरों को दी गई। आरोप है कि डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर नहीं माना और इलाज से सब ठीक होने का भरोसा देते रहे। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर उसे बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया।

जब स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब उसे दूसरे निजी अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद दूसरे नवजात को भी शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उसकी हालत नाजुक बताते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया, जहां उसका उपचार जारी है। नवजात की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। वे आयुष्मान अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगने लगे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय उन्हें मेडिकल नियमों का हवाला देना शुरू कर दिया। इससे विवाद बढ़ गया और अस्पताल स्टाफ तथा परिजनों के बीच तीखी बहस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। परिजन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सक डॉ. ज्योति श्रीवास्तव को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे।

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पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि नवजात की मौत के बाद उन्होंने स्वयं पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दी थी और अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही की जानकारी दी थी। इसके बावजूद पुलिस समय पर अस्पताल नहीं पहुंची। परिजनों का कहना है कि जब अस्पताल में विवाद बढ़ा और प्रबंधन की ओर से सूचना दी गई, तब पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई। इसे लेकर भी परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार

वहीं अस्पताल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल का कहना है कि नवजात की हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। पीलिया के लक्षण दिखाई देने के बाद आवश्यक उपचार शुरू किया गया और जब स्थिति गंभीर हुई, तभी बच्चे को रेफर किया गया। प्रबंधन का दावा है कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

फिलहाल पूरे मामले में एक ओर पीड़ित परिवार अस्पताल पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन सभी आरोपों से इनकार कर रहा है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत इलाज में कथित लापरवाही का परिणाम थी या चिकित्सकीय जटिलताओं का। तब तक यह मामला निजी अस्पतालों में नवजात शिशुओं के उपचार, रेफरल प्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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